Saturday, 15 October 2016

            एक दिल को छू लेने बाली घटना

आज का दौर सामान्यतः गिरते सामाजिक मूल्यों के लिए बदनाम है लेकिन कल की एक घटना दिल को छू  गई।

मैं कल दोपहर बाद जमुई से सड़क मार्ग से वापस झाझा की ओर आ रहा था। साथ में मेरे पिताजी और परिवार के कुछ सदस्य थे। पिताजी के लिए कुछ दवाई खरीदने के लिए गिधौर में रुका। गाडी रोकी और बाहर निकला। मेरे साथ मेरे संबंधी भी निकले। इसी दौरान गाडी से उतरने के क्रम में सीट पर रखा मेरा मोबाइल सैमसंग J7 भी सीट से सरककर सड़क पर गिर गया जिसकी खबर हममें से किसी को नहीं हुई। हम दोनों दूकान की तरफ बढ़ गए दवा लेने और गाडी में मेरे पिताजी और एक महिला संबंधी रही।
मोबाइल गिर जाने का अंदाजा किसी को नहीं था। अचानक साधारण सा दिखने बाला साधारण वेशभूसा में एक 10-12 साल का बच्चा मोबाइल लेकर मेरे पिताजी के पास आया जो दूसरी तरफ की सीट पर बैठे थे और मोबाइल देते हुए बोला कि ये मोबाइल जो दवा की दुकान पर गए है उनसे गिर गया है। पिताजी जबतक कुछ समझ पाते तबतक वो बच्चा मोबाइल मेरे पिताजी को सौंप कर चला गया। पिताजी मोबाइल को उलट पलट कर यह निश्चित करना चाहते थे की मोबाइल हमलोगों में से किसी का था या नहीं।
सारी बातों को समझकर जबतक पिताजी नजर उठाते तबतक वो बच्चा जा चुका था।
इसी बीच हमलोग भी दवा लेकर वापस आ गए। पिताजी मोबाइल दिखाकर पूछने लगे कि ये हमलोगों का है या नहीं। मैंने तुरंत अपने मोबाइल को पहचानकर कहा कि हाँ मेरा है और पीछे की सीट पर रखा था। तब पिताजी ने सारी बात बताई । मैंने तुरंत उस बच्चे के बारे में पूछा लेकिन वो तो जा चूका था। मेरा मन उस बच्चे के प्रति आदर से भर गया। जरूर उसके माता पिता संस्कारवान होंगे जो उन्हें इतना चरित्रवान बच्चा पुत्र के रूप में मिला है।माता पिता को भी मेरा सादर नमन।
देखने से तो वो बच्चा एक साधारण आर्थिक स्थिति के घर का लगा लेकिन उसके पास जो ये चारित्रिक बल है ये उसे विशिष्ठ की श्रेणी में ले आता है।
दुःख इस बात का रह गया कि मैं इस बच्चे को देख भी नहीं पाया आभार के दो शव्द भी नहीं कह पाया। शायद उससे कभी मुलाकात हो जाए शायद ये पोस्ट उस तक पहुँच जाये किसी तरह बस इसी उम्मीद और आभार के दो शब्द कहने के लिए ये प्रयास है मेरा।
बेटे तुमने ये सावित कर दिया की तमाम विपरीत परिस्थितियों के वावजूद सच्चाई अभी भी जिन्दा है और तुम जैसे बच्चे इस मशाल को सब दिन जलाये रहोगे।